
श्री रमेश चन्द्र शर्मा गुरु जी (खुट्टू मास्टर जी)
माँ मंसा देवी की शोभा यात्रा को संगठित रूप देकर नगर की सामूहिक भक्ति और सेवा परंपरा की नींव रखी।
माँ मंसा देवी • काशीपुर
आपके चुने हुए स्थान का दैनिक पंचांग तथा आने वाले पर्व
ॐ ह्रीं क्लीं ऐं मंसा देव्यै स्वाहा || ॐ नमः शिवाय
मोहल्ला लाहोरियान में अवतरित 7 फीट विशाल स्वयंभू पावन पिंडी का अलौकिक दर्शन, और शरद नवरात्रि की महाअष्टमी पर काशीपुर में निकलने वाली माँ मंसा सेना की 50+ वर्ष प्राचीन ऐतिहासिक शोभा यात्रा।
काशीपुर के ऐतिहासिक मोहल्ला लाहोरियान में सौ वर्ष से भी अधिक पूर्व स्वर्ण भद्रिका नदी (वर्तमान ढेला नदी) की पावन जलधारा बहती थी। जनश्रुति एवं मंदिर अभिलेखों के अनुसार एक परम भक्त को स्वप्न में भगवती मंसा देवी के साक्षात् दर्शन हुए तथा पावन उपस्थिति का संकेत मिला।
जब स्थानीय नागरिकों ने भक्तिभाव से उस स्थल पर खुदाई की, तो लगभग 7 फीट लंबी विशाल अलौकिक पाषाण पिंडी स्वरूप में प्रकट हुई। इस दिव्य चमत्कार को देखकर नगरवासियों ने शीश नवाया और ठीक उसी पावन स्थल पर गर्भगृह की स्थापना की।
जनवरी माह में मंदिर जीर्णोद्धार वार्षिक उत्सव, राम मंदिर स्थापना दिवस पर प्रसाद वितरण, हनुमान जयंती 56 भोग, माह शिवरात्रि पर रात्रि शिव विवाह पूजन, सावन में शर्बत वितरण एवं भंडारे, विभिन्न दिवसों पर शर्बत एवं छोले वितरण , श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर झांकी, श्री कृष्ण छठी एवं श्री राधा अष्टमी पर कढ़ी चावल का भोग वितरण, श्री गणेश चतुर्थी पर संगीत संध्या एवं विभिन्न उत्सव।

काशीपुर (ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड)
यह पाषाण पिंडी लगभग 4 फीट धरातल के भीतर समाहित है और लगभग 3 फीट पावन स्वरूप श्रद्धालुओं के प्रत्यक्ष दर्शन हेतु सुशोभित है।
कुल माप: 7 फीट | स्वयंभू पाषाण शिला
मंदिर में स्थित मुख्य मठ का वास्तविक स्वरूप — श्रद्धालुओं के दर्शन, आरती और विशेष श्रृंगार का पावन केंद्र।
पिंडी के ऊपरी भाग में नागराज के फणों की प्राकृतिक अनुकृति दृष्टिगोचर होती है। माँ मंसा देवी को नागराज वासुकि की भगिनी एवं कश्यप ऋषि की मानसी कन्या माना गया है।
पवित्र पिंडी का स्पर्श सर्वथा वर्जित है; जल, दूध, पुष्प, नारियल एवं चुनरी निर्धारित अर्घ्य पात्र अथवा मुख्य सेवादार के माध्यम से समर्पित होते हैं।
मुख्य मंदिर परिसर में श्री गणेश, पंचमुखी हनुमान जी, शिव परिवार, भैरव बाबा एवं श्री बांके बिहारी जी के पावन विग्रह प्रतिष्ठित हैं।
माँ मंसा देवी के मुख्य मठ के पावन दर्शन करें, मंगल ध्वनियाँ सुनें और आरती पढ़ें।
दीप पर क्लिक करें या “दीप प्रज्वलित करें” दबाएँ; ज्योति और आलोक प्रभाव सक्रिय हो जाएगा।
50 से अधिक वर्षों की अविराम भक्ति गंगा: महाअष्टमी की पावन तिथि पर जब संपूर्ण काशीपुर पुष्पवर्षा, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ माँ के डोले की अगवानी करता है।
भक्तजन नंगे पैर हजारों भक्तों की भीड़ के साथ माँ का डोला (रथ स्वरूप) खींच कर शहर भ्रमण एवं माँ चामुंडा देवी मंदिर दर्शन को जाता है ,भक्त माँ के डोले में स्थापित प्रतिमा के एक दर्शन के लिए साल भर लालायित रहते हैं।
शोभा यात्रा में उत्तर प्रदेश, दिल्ली एवं उत्तराखंड के विख्यात कलाकारों द्वारा महाकाली का प्रचंड तांडव, राधा-कृष्ण रास, अघोरी नृत्य, शिव-विवाह तथा राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत सजीव झांकियां मंत्रमुग्ध करती हैं।
काशीपुर के व्यापार मंडल एवं धर्मप्रेमी हर चौराहे पर तोरण द्वार बनाकर क्विंटलों पुष्पों की वर्षा करते हैं। शीतल पेय, फल, हलवा-चना एवं प्रसादी के सैकड़ों स्टॉल नगर में सेवा का अनूठा उदाहरण पेश करते हैं।
1972 में आरंभ हुई सेवा परंपरा को परिवार और सहयोगियों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाया।

माँ मंसा देवी की शोभा यात्रा को संगठित रूप देकर नगर की सामूहिक भक्ति और सेवा परंपरा की नींव रखी।

पिता द्वारा प्रारंभ की गई पावन परंपरा को आगे बढ़ाया और आयोजन की निरंतरता, अनुशासन व भव्यता बनाए रखी।

2024 के बाद परिवार, माँ मंसा देवी यूथ क्लब और सहयोगियों के साथ इस परंपरा को श्रद्धा और समर्पण से आगे बढ़ा रहे हैं।
2026 के आमंत्रण एवं स्मारिका से संकलित कार्यक्रम, समिति, सेवक, सहयोग और आरती संबंधी महत्वपूर्ण विवरण।
उत्तर भारत की ऐतिहासिक भव्य विशाल शोभा यात्रा
काशीपुर नगर के प्रमुख मार्गों से होकर निकलेगी, अतः आप सभी शोभा यात्रा में शामिल होकर माँ का आशीर्वाद प्राप्त करें।
जिन दिवंगत सदस्यों ने माँ की सेवा और आयोजन की परंपरा को संबल दिया, उनका योगदान सदैव आदरपूर्वक स्मरणीय रहेगा।
रविवार, 18 अक्टूबर को पूजन और यात्रा का शुभारंभ; सोमवार, 19 अक्टूबर की भोर में मंदिर वापसी। सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं। मार्ग के दौरान भीड़ और व्यवस्था के अनुसार आगमन समय में परिवर्तन संभव है।
खुट्टू जी के घर से माता की मूर्ति का माँ मंसा देवी मंदिर के लिए प्रस्थान; तत्पश्चात विधि-विधान से पूजा, हवन एवं यज्ञ
माँ मंसा देवी मंदिर
माँ मंसा देवी मंदिर
माँ मंसा देवी मंदिर
मंदिर से शोभायात्रा का प्रारंभ
डोले का पूजन
शोभायात्रा का मुख्य बाजार में प्रवेश
डोले का आगमन
डोले का पुनः आगमन
डोले का आगमन
डोले का आगमन
डोले का आगमन
डोले का आगमन
डोले का आगमन एवं आरती
डोले का आगमन
पुनः आगमन
डोले का आगमन
शोभायात्रा वापसी, आरती एवं प्रसाद वितरण
सैकड़ों वर्ष पूर्व काशीपुर में माँ की प्रतिमा को शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर एक टोकरी में सिर पर रखकर और कालांतर में हाथ के ठेले पर सजा कर नगर भ्रमण कराया जाता था। वर्ष 1972 के आसपास स्व० रमेश चंद्र शर्मा (उर्फ खुट्टू मास्टर) ने इस यात्रा को संगठित स्वरूप प्रदान किया।
खुट्टू मास्टर जी के अथक समर्पण से यह शोभा यात्रा काशीपुर का पर्याय बन गई। उनके देवलोकगमन के उपरांत उनके ज्येष्ठ पुत्र स्वर्गीय श्री पंडित विकास शर्मा ‘खुट्टू’ ने पूरी निष्ठा, आधुनिक तकनीकी और भव्यता के साथ इस विरासत की कमान सँभाली। आज परिवार, सेवादारों और समस्त नगरवासियों के सहयोग से यह परम्परा और अधिक गरिमामय रूप में आगे बढ़ रही है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार माँ मंसा देवी और माँ चामुंडा देवी का आपस में आत्मीय भगिनी (बहन) संबंध है। वर्ष भर दोनों देवियाँ अपने-अपने निज धाम में भक्तों को दर्शन देती हैं, किंतु वर्ष में केवल एक बार — शारदीय महाअष्टमी की रात्रि — माँ मंसा देवी स्वयं अपनी बहन माँ चामुंडा से मिलने उनके धाम (किला/चामुंडा मंदिर) पधारती हैं।
जब माँ मंसा देवी का भव्य डोला माँ चामुंडा मंदिर की चौखट पर पहुँचता है, तो दोनों स्वरूपों की विशेष भेंट कराई जाती है। इस अलौकिक मिलन को देखने के लिए समूचा काशीपुर उमड़ पड़ता है और आरती के समय पुष्पों व जयकारों से आकाश गुंजायमान हो उठता है।
माँ मंसा देवी शोभा यात्रा की सबसे पावन विशेषता यह है कि यह केवल एक समुदाय का पर्व न होकर समूचे काशीपुर का साझा उत्सव है। मुख्य बाजार, मोहल्ला लाहोरियान, पक्का कोट तथा स्टेशन रोड पर हिन्दू, मुस्लिम, सिख और व्यापारी वर्ग मिलकर माँ के डोले पर पुष्प वर्षा करते हैं।
मार्ग के हर घर व दुकान की छत से गुलाब व गेंदा के फूलों की अनवरत वर्षा।
मुस्लिम व सिख भाइयों द्वारा विशेष छबील व शरबत के स्टॉल।
स्थानीय युवाओं का संयुक्त दल भीड़ नियंत्रण व बुजुर्गों की सहायता में तत्पर।
दर्शकों के बिना किसी अवरोध के शांतिपूर्ण एवं उल्लासपूर्ण आयोजन।
“चाहे हिंदू भाई हों या मुस्लिम या सिख, जब माँ मंसा देवी का डोला बाजार से निकलता है तो हर कोई नतमस्तक होकर स्वागत करता है। कोई शरबत पिलाता है, कोई फल बाँटता है, तो कोई झांकियों के कलाकारों का अभिनंदन करता है। यही हमारे उत्तराखण्ड और काशीपुर की असली संस्कृति है।”
काशीपुर की सड़कों पर माँ के जयघोष, मंसा सेना के सेवादारों और मनोरम झांकियों के यादगार क्षण।
शोभा यात्रा में अग्रणीय माँ की डोली, जिसे खींचने एवं कंधा लगाने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु कतारबद्ध रहते हैं।
आसुरी शक्तियों के संहार का जीवंत मंचन, जो दर्शकों को श्रद्धा और विस्मय से भर देता है।
फूलों की होली और सुमधुर भजनों के साथ ब्रज के पारंपरिक रास का मनोहारी प्रदर्शन।
धर्म के साथ राष्ट्र रक्षा का संदेश देने वाली अद्वितीय देशभक्ति झांकियां।
खुट्टू मास्टर की प्रेरणा से गठित युवा संगठन जो पूरी यात्रा में व्यवस्था एवं जल सेवा संभालता है।
लाखों श्रद्धालुओं हेतु शुद्ध देसी घी का महाप्रसाद एवं दिन-रात चलने वाला अखंड लंगर।
मंदिर दर्शन, शोभा यात्रा, झांकियों, आरती, भंडारे और विशेष आयोजनों की नवीन झलकियाँ।
शोभायात्रा के लाइव वीडियो, नवीन दर्शन, झांकियों की तस्वीरें, आरती और भण्डारे की ताज़ा सूचनाओं के लिए हमारे आधिकारिक फेसबुक पेज से जुड़ें।
@MansaDeviShobhaYatra.ksp
🚩 माँ मंसा देवी शोभा यात्रा • 🌺 माँ के दर्शन • 🪔 धार्मिक आयोजन • 🤝 सेवा • 📍 काशीपुर, उत्तराखंड
फेसबुक पेज फॉलो करें
माँ मंसा का पावन नाम ही 'मंसा' (मन की कामना) पूर्ण करने वाला है। अपनी प्रार्थना लिखें और डिजिटल मौली सूत्र अर्पित करें।
श्रद्धालुओं के लिए दैनिक पंचांग, शुभ संकेत, सूर्योदय-सूर्यास्त और विशेष संदेश। काशीपुर के लिए दैनिक पंचांग खगोलीय गणना से स्वतः अपडेट होता है। इंटरनेट उपलब्ध न होने पर पिछली सफल जानकारी के स्थान पर स्पष्ट स्थिति दिखाई जाएगी।
शुभ कार्य प्रारंभ करने से पहले माँ मंसा देवी का स्मरण करें। दिनभर संयम, सेवा और भक्तिभाव के साथ कार्य करें।
हिन्दू पर्व, महत्वपूर्ण तिथियाँ और माँ मंसा देवी शोभा यात्रा के प्रमुख आयोजन तारीख के अनुसार स्वतः क्रमबद्ध होते हैं।

🌺 रविवार, 18 अक्टूबर 2026 · माँ मंसा देवी मंदिर, मोहल्ला लाहौरियान, काशीपुर
🪔 मूर्ति पूजन दोपहर 1:00 बजे · 🚩 यात्रा प्रस्थान अपराह्न 3:00 बजे
2026 पर्व तिथियाँ संदर्भ सूची हैं; आने वाले वर्षों के लिए verified data source आवश्यक है। 8 नवंबर लक्ष्मी पूजा समय: Drik Panchang, काशीपुर। स्रोत जाँचें ↗
माँ मंसा देवी मंदिर एवं शोभा यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए संक्षिप्त जानकारी। कार्यक्रम में बदलाव के लिए समिति की ताज़ा आधिकारिक सूचना देखें।
मोहल्ला लाहोरियान, काशीपुर, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड। नीचे दिए मंदिर मानचित्र लिंक से दिशा देखें।
रविवार, 18 अक्टूबर 2026, अपराह्न 3 बजे; प्रस्थान स्थल माँ मंसा देवी मंदिर, मोहल्ला लाहोरियान, काशीपुर।
इस website के कार्यक्रम, यात्रा मार्ग और आधिकारिक Facebook updates sections देखें। 'LIVE' के नाम से कोई अप्रमाणित स्थान या समय नहीं दिखाया जाएगा।
डिजिटल दर्शन में गेंदा, गुलाब या चमेली चुनें। दीप प्रज्वलन और मंगल ध्वनि के लिए अलग बटन हैं; आवश्यकता पड़ने पर ध्वनि बंद करें।
संपर्क एवं सेवा section का फॉर्म भरें। फॉर्म सफल होने पर reference number मिलेगा। अंतिम सेवा आवंटन समिति की पुष्टि पर निर्भर है।
काशीपुर रेलवे स्टेशन अथवा बस अड्डे से ई-रिक्शा या ऑटो द्वारा मात्र 5 से 10 मिनट में मोहल्ला लाहोरियान स्थित माँ मंसा देवी मंदिर पहुँचा जा सकता है।
प्रातः काल: ०५:३० बजे से दोपहर १२:०० बजे तक
संध्या काल: ०४:३० बजे से रात्रि ०९:३० बजे तक
(नवरात्रि महापर्व में मंदिर के पट अनवरत दर्शनार्थ खुले रहते हैं)
• काशीपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन: 1.8 किमी
• काशीपुर बस स्टैंड (रोडवेज): 1.5 किमी
• मुख्य एमपी चौक: 800 मीटर
• चीमा चौराहा: 1.2 किमी
माँ मंसा देवी मंदिर प्रबंध समिति एवं माँ मंसा यूथ क्लब
मोहल्ला लाहोरियान, काशीपुर (ऊधम सिंह नगर), पिन: 244713
मोहल्ला लाहौरियान, काशीपुर, उत्तराखंड
🧭 Google Maps पर रास्ता देखें ↗आगामी शोभा यात्रा में सेवा हेतु अपनी रुचि दर्ज करें।
समिति से संपर्क के लिए विवरण सुरक्षित प्राप्त हुआ है।
🔒 यह व्यक्तिगत विवरण केवल आपकी स्क्रीन पर दिखाई दे रहा है; सार्वजनिक सूची में नहीं जाएगा। समिति आवश्यकता होने पर संपर्क करेगी।
बार-बार लिंक खोलने की जरूरत नहीं। इसे फोन की Home Screen पर जोड़ सकते हैं।
यह वेबसाइट shortcut/PWA है; आपके बैंकिंग ऐप, SMS या फोन के डेटा की अनुमति नहीं माँगती। Notifications वैकल्पिक हैं।